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Showing posts from June, 2018

घर । एक स्वप्न ।

_घर_ छोड़ गए थे वोह गालियां छोड़ गए थे वोह चौबारे चले थे जवान सीना तान के मातृभूमि के रक्षा के लिये जान पर खेल कर जान छिड़क कर रख के देश का मान घर पे उनकी राह देखती माँ का बेचैन मन सं...