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घर । एक स्वप्न ।

_घर_

छोड़ गए थे वोह गालियां
छोड़ गए थे वोह चौबारे
चले थे जवान सीना तान के
मातृभूमि के रक्षा के लिये
जान पर खेल कर
जान छिड़क कर
रख के देश का मान
घर पे उनकी राह देखती
माँ का बेचैन मन
संदेशा मिला रणभूमि से
हुई सफल सबकी दुआ
जंग जीत कर आ रहे हैं
वापसी घर को उनका हुआ
चहक उठा घर ख़ुशियों से
चेहरा खिल गया सबका मुस्कुराहट से
जवानों की खुशी अनमोल थे
घर की यादों में बिताए हुए इतने साल थे

Seetal(Seepra)
@areum_margaret

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